Sunday, November 9, 2008

कौन है ...

रात को सोते से ज़गाकर, खामोशी मैं गुनगुनाता कौन है
ये रहगुज़र तो सुनसान है, फिर मूझे बुलाता कौन है !

बचपन की ख्वाईशो मैं डूबे, वो लम्हे पुराने तो सब बीत गए
अक्सर भीड़ मैं सुन लेता हूँ जिसे, वो धुन फिर बजाता कौन है !

गुमनाम हवेली जिसकी पनाह मैं सिर्फ सूनापन है
हर शाम उसकी खिड़की पे आकर ये मुस्कुराता कौन है !

ये कदम तो टहरते नहीं फूलो के महकते गुलसन मैं भी
तो फिर मिटटी के टुकडो मैं भी, खुसबू ढूँढ लाता कौन है !

मासूमियत को ख्वाबो मैं ढालते, बचपन के सांचे तो सब टूट गए
फिर बेखबर हो सब से, बदलो के टुकडो मैं शकले बनाता कौन है !

ये साहिल जहाँ हर कोई मिट्टी के घरोदे बनाने मैं मसरूफ़ है
वहां मेरा हाथ पकड़कर, ये लहरों मैं ले जाता कौन है !

उजड़ी गुमनाम बस्ती जहाँ से अब कोई नहीं गुजरने वाला
वहां पेड तले हर रात, ये दीया जला जाता कौन है !

ये गावं जहाँ बारिस की बूंदे गिरे जमाना हो गया
वहां ये कागज़ की नाव से, बच्चो को बहलाता कौन है !

जस्न की ये महफिल जहाँ सिर्फ मदहोशी मैं छलकते जाम हैं
वहां खामोशी ओढे चुपके-चुपके ये पलके भिगाता कौन है !

ये बस्तिया जहाँ शाम ढलते-ढलते जिंदगियां भी ढल जाती हैं
वहां पूरी रात श्याही से कागज़ रंगते, ये मोमबतियां पिघलाता कौन है !

रुके हुए काफिलों से ये बस्तिया, जहाँ आखे एक आहट पे चोंक जाती हैं
वहां भूक से जगे हुए बच्चो को, ये परियो की कहानिया सुनाता कौन है !

रास्ते बदल गए, मंजिलो को छोडे हुए भी अब ज़माना हो गया
फिर निशा के टूटते-टूटते, मूझे वापस उन्ही मोडो तक छोड़ आता कौन है !

ये घर जहाँ उम्मीद अब दरवाज़े पे आकर लौट जाती है
वहां रोज आकर मेरे ख्वाबो को नई उम्र दे जाता कौन है !

एक अर्सा हो गया है , इस घर से जिंदगी को गए हुए
फिर मेरे आगन मैं, ये बारिस के बूंदों मैं हाथ फैलाता कौन है !

उम्र के संग ज़माने मैं रमते हुए, जब लगता है की अहसास संभलने लगे हैं
फिर अचानक गीली हथेलियों से, इस तपते ज़हन को छु जाता कौन है !

इमारत की चारदीवारियों बढाते, अपने दायरों को समझते, सवारते खुश रहता हूँ
फिर अक्सर रातो को आकर, मेरे सिरहाने पर तकिये को भीगा जाता कौन है ...!!!

4 comments:

Ashish said...

some hindi text is not proper for me... :-( :-(

Parul kanani said...

expressive words...very nice!!

Anonymous said...

thanx a lot... :)

Xameer said...

author[ed] is a lame joke