Tuesday, May 27, 2014

आ तुझे एक खवाब दे दूँ ..

आ तुझे एक खवाब दे दूँ
तेरे अनकहे सवालो का जवाब दे दूँ  !!
बड़ी शिददत से संजोए हुऐ हैं जो लम्हे
आ तुझे, वो बचपन की किताब दे दूँ  !!
जो कभी इस सहरा मे बरस ना पाई
आ तुझे, उन बूँदो का हिसाब दे दूँ  !!
जिंदगी अक्सर, तेरी मुस्कुराहट के आस पास ही मिली मुझे
आ तुझे, मैं आज, ये अहसास दे दूँ  !!
बेचैन इन लहरो को, एक दिन किनारे मिलेंगे ज़रूर
आ तुझे, मैं फिर से, ये विस्वास दे दूँ  !!
खता किसी की भी हो, सज़ा तो दोनो ने पाई है
रास्ते बिछड़ने से पहले, आ तुझे एक आवाज़ दे दूँ  !!!

Saturday, May 24, 2014

भारत महान ...

बड़े घने अंधेरे हैं, इन चमकते चिरागो के नीचे 
जाने कितनी चीखे दबी हैं, जश्न की आवाज़ो के पीछे !
बड़ा जहर घुला है, इन उम्मीदो की हवाओं मे
जाने कितने गुनाह छिपे हैं, इन मातृभूमि की सदाओ मे !
जाने कितने और घर उज़ड़ेगे, विकास के इंतज़ाम मे
जाने क्‍या-क्या लुट जाना है, इस राष्टवादी संग्राम मे !
फिर से उग आई हैं लकीरें, सपनो के जहान मे
जाने कितनी लाशें दफ़न है, मेरे भारत महान मे  ... !!!