Saturday, May 24, 2014

भारत महान ...

बड़े घने अंधेरे हैं, इन चमकते चिरागो के नीचे 
जाने कितनी चीखे दबी हैं, जश्न की आवाज़ो के पीछे !
बड़ा जहर घुला है, इन उम्मीदो की हवाओं मे
जाने कितने गुनाह छिपे हैं, इन मातृभूमि की सदाओ मे !
जाने कितने और घर उज़ड़ेगे, विकास के इंतज़ाम मे
जाने क्‍या-क्या लुट जाना है, इस राष्टवादी संग्राम मे !
फिर से उग आई हैं लकीरें, सपनो के जहान मे
जाने कितनी लाशें दफ़न है, मेरे भारत महान मे  ... !!!

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