Thursday, July 2, 2009

और ...

खामोसियो के गुनाह, और भी हैं
इन अंधेरो मैं पनाह, और भी है !!

नम पलकों मैं गुन्जाएश, और भी है
कुछ दर्द की फरमाइश, और भी है !!

इस रहगुजर की दास्तान और भी हैं
कुछ आईने अनजान और भी हैं !!

कहीं लफ्ज़ गुमनाम और भी हैं
कुछ समां के बयान और भी हैं !!

सुर्ख गालो पे निशान और भी हैं
इस बस्ती मैं श्मसान और भी हैं !!

इन लकीरो के फरमान और भी हैं
इस समुन्दर मैं तूफान और भी हैं !!

फासले, दरमियान और भी हैं
होंसलों के इम्तिहान और भी हैं !!!

2 comments:

Parul kanani said...

wah..wah!! :)

Parul kanani said...
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